A HOUSE IS NOT A HOME -BY ZAN GAUDIOSO HINDI TRANSLATION


A HOUSE IS NOT A HOME -BY ZAN GAUDIOSO

My first year of high school felt awkward. After leaving junior high at the head of my class with all the seniority the upper grade levels could afford me, it felt strange starting over as a freshman. The school was twice as big as my old school, and to make matters worse, my closest friends were sent to a different high school. I felt very isolated.
हाई स्कूल का मेरा पहला साल अजीब लगा।  जूनियर स्तर की कक्षा का मॉनीटर होकर बाद मुझे उच्च स्तर वाले बर्दाश्त कर सक थे , एक नए व्यक्ति के रूप में शुरू करने में अजीब लगा।  स्कूल मेरे पुराने स्कूल से दोगुना बड़ा था, और मामले को बदतर बनाने के लिए, मेरे सबसे करीबी दोस्तों को एक अलग हाई स्कूल में भेजा गया था।  मुझे बहुत अलग-थलग महसूस होता था ।


I missed my old teachers so much that I would go back and visit them . They would encourage me to get involved in school activities so that I could meet new people . They told me that in time I would adjust and probably end up loving my new school more than I had my old one . They made me promise that when that happened I would still come by and visit them from time to time . I understood the psychology in what they were saying , but I took some comfort in it nonetheless . मैं अपने पुराने अध्यापकों को अधिक याद करता था कि उनसे जाकर मुलाकात करता था । वे मुझे उत्साहित करते थे कि विद्यालय की गति - विधियों में शामिल रहूँ ताकि मैं नए लोगों से मिल सकूँ । वे मुझे बताते थे कि समय आने पर मैं सामंजस्य स्थापित कर लूंगा और अपने नए स्कूल को पुराने से ज्यादा प्यार करने लगूंगा । उन्होंने मेरे से वायदा भी किया कि जब ऐसा हो जाएगा तो मैं उबर जाऊँगा और समय - समय पर उनसे मिलता रहूँगा । मैंने उस मानसिकता को समझ लिया था जिस कारण वे कह रहे थे , तथापि इससे मुझे कुछ आराम अवश्य मिला ।



 One Sunday afternoon , not long after I had started high school , I was sitting at home at our dining - room table doing homework . It was a cold and windy fall day , and we had a fire going in our fireplace . As usual , my red tabby cat was lying on top of all my papers , purring loudly and occasionally swatting at my pen for entertainment's sake . She was never far from me . I had rescued her when she was a kitten , and somehow she knew that I was the one responsible for giving her the good life ' हाईस्कूल शुरू किए ज्यादा समय नहीं हुआ था कि एक रविवार की दोपहरी को मैं अपने भोजन करने की मेज पर बैठा अपना गृहकार्य कर रहा था । यह एक ठंड और हवादार दिन था और हमने अपने अग्नि स्थलों पर आग जला रखी थी । रोजाना की भाँति , मेरी लाल धब्बो वाली बिल्ली मेरे सारे कागजों के ऊपर बैठी हुई जोर - जोर से घुरघुरा रही थी और कभी - कभार मेरे पेन के पास आनंद प्राप्ति के लिए मक्खियों को मार रही थी । वह कभी भी मुझसे दूर नहीं होती थी । मैंने उसे बचाया था जब वह एक छोटी बच्ची थी , और किसी प्रकार वह जानती थी उसको ' अच्छा जीवन देने के लिए मैं जिम्मेदार था । 


My mother kept stoking the fire to keep the house nice and warm . Suddenly , I smelled something strange , and then I noticed it .. smoke pouring in through the seams of the ceiling . The smoke began to fill the room so quickly that we could barely see . Groping our way to the front door , we all ran out into the front yard . By the time we made our way outside , the whole roof was engulfed in flames and it was spreading quickly . Iran to the neighbours to call the fire department , while I watched my mother run back into the house मेरी माँ ने आग में कोयला डालना जारी रखा ताकि घर को बढ़िया व गर्म रखा जा सके । अचानक मैने कुछ विचित्र
सूंघा और तब मैंने ध्यान आकृष्ट किया .... धुआँ घर की छत के जोड़ों से होकर अंदर फैल रहा था । धुआँ इतनी जल्दी कमरे में भरना शुरू हुआ कि हम मुश्किल से देख सकते थे । सामने का दरवाजा टटोलकर हम सभी आँगन की ओर दौड़े । जिस समय सभी बाहर निकलने का रास्ता बना रहे थे , संपूर्ण छत पर आग की लपटें थीं तथा शीघ्रता से फैल रही थी । मैं पड़ोसियों की ओर अग्निशमन विभाग के वाहन को बुलाने को भागा । जबकि मैंने अपनी माँ को मकान में वापस भागते हुए देखा ।

My mother then ran out of the house carrying a small metal box full of important documents . She dropped the case on the lawn and , in a crazed state , ran back into the house . I knew what she was after . My father had died when I was young , and I was certain that she was not going to let his pictures and letters go up in flames . They were the only things that she had to remember him by . Still I screamed at her , “ Mom ! No ! " I was about to run after her when I felt a large hand hold me back . It was a fireman . I hadn't even noticed that the street had already filled with fire trucks . I was trying to free myself from his grasp , yelling , “ You don't understand , my mother's in there ! " He held on to me while other firefighters ran into the house . He knew that I wasn't acting very logically and that if he were to let go , I'd run . He was right .It's all right , they'll get her , " he said . He wrapped a blanket around me and sat me down in our car . Soon after that , a fireman emerged from our house with my mom in tow . He quickly took her over to the truck and put an oxygen mask on her . I ran over and hugged her . All those times I ever argued with her and hated her vanished at the thought of losing her . " She's going to be okay , " said the fireman . " She just inhaled a little smoke . " And then he ran back to fight the fire while my mother and I sat there dazed . I remember watching my house burn down and thinking that there was nothing I could do about it .
मेरी माँ तब जरूरी दस्तावेजों से भरे एक धातु के छोटे बक्से को उठाए हुए भागते हुए मकान से बाहर आई । उसने बक्से को लॉन में गिरा दिया और एक पागलपन की दशा में वापस मकान के अंदर भागी । मैं जानता था कि वह किसके पीछे थी । मेरे पिता उस समय मर गए थे जब मैं बहुत छोटा था और मुझे पक्का पता था कि वह ( माँ ) उनकी तस्वीरों और पत्रों को आग की लपटों में नहीं जलने देगी । ये चीजें वही थीं जिससे वह उन्हें याद करती थी । मैं निश्चल होकर उन पर चिल्लाया , “ माँ ! नहीं ! " मैं उसके पीछे दौड़ने ही वाला था कि मैंने अनुभव किया कि एक बड़े हाथ ने मुझे पीछे से पकड़ लिया । यह एक अग्निशमनकर्ता था । मैंने इस बात पर गौर नहीं किया था कि गली पहले से ही आग बुझाने वाले ट्रकों से भर चुकी थी । मैं स्वयं को उसकी गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश कर रहा था , “ तुम नहीं समझते , “ मेरी माँ वहाँ अंदर है । " उसने मुझे पकड़े रखा जबकि दूसरे अग्निशामक घर के अंदर घुसे । वह जानता था कि मैं बहुत तार्किक तरीके से काम नहीं कर रहा था और वह मुझे जाने देता तो मैं भाग जाता । वह सही था । " सब कुछ बिल्कुल ठीक है , वे उसे बचा लेंगे , उसने कहा । " उसने मेरे चारों ओर एक कंबल लपेटा और मुझे कार में बैठा दिया । इसके बाद शीघ्र ही एक अग्निशामक मेरी माँ को खींचते हुए घर के बाहर आया । वह तेजी से उन्हें ट्रक पर ले गया और उन पर ऑक्सीजन मॉस्क लगा दिया । मैं भागकर उनसे लिपट गया । इस पूरे समय में , मैं उनसे विवाद करता रहा और उनके खो जाने के विचार से नफरत करता रहा । " " वह ठीक हो जाएगी " , अग्निशामक ने कहा , “ उसने थोड़े से धुएँ को साँसों से खींच लिया है । " और फिर वह वापस दौड़ गया आग से लड़ने के लिए । मेरी माँ और मैं बदहवास हुए वहीं बैठे रहे । मुझे घर को जलते हुए देखना स्मरण है तथा यह सोचना कि मैं कुछ नहीं कर सकता था ।


Five hours later , the fire was finally out . Our house was almost completely burned down . But then it struck me ... I hadn't seen my cat . Where was my cat ? Much to my horror , I realised that she was nowhere to be found . Then all at once it hit me- the new school , the fire , my cat - I broke down in tears and cried and cried . I was suffering loss , big time . The firemen wouldn't let us go back into the house that night . It was still too dangerous . Dead or alive , I couldn't imagine leaving without knowing about my cat . Regardless , I had to go . We piled into the car with just the clothes on our backs and a few of the firemen's blankets , and made our way to my grandparents house to spend the night . पाँच घंटे के बाद आग बुझ गई । हमारा घर लगभग पूरी तरह से जल चुका था । तभी एक बात ने मुझे चौंका दिया मैंने अपनी बिल्ली को नहीं देखा । मेरी बिल्ली कहाँ है ? भयभीत होकर मैने एहसास किया कि वह कहीं नहीं मिल रही थी । तब अचानक इस बात ने मुझे गंभीर चोट दी- नया स्कूल , आग , मेरी बिल्ली , मैं अश्रुओं में डूब गया और चिल्लाता रहा । मैं लंबे समय तक इस क्षति को सहन करता रहा । अग्निशामक ने उस रात को हमें वापस घर नहीं जाने दिया । यह अब भी बहुत खतरनाक था । मेरी बिल्ली जीवित है या मर गई है , यह जाने बिना , मैं जाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था । लेकिन इस बात से बेखबर मुझे जाना पड़ा । हम कार में अपने बचे हुए कपड़ों एवं शामकों के कंबलों को लेकर एकत्र हो गए तथा अपने दादा के घर की तरफ रात गुजारने के लिए चल पड़े ।


The next day , Monday , I went to school . When the fire broke out , I was still wearing the dress I had worn to church that morning but I had no shoes ! I had kicked them off when I was doing my homework . They became yet another casualty of the fire . So I  had to borrow some tennis shoes from my aunt . Why couldn't I just stay home from school ? My mother wouldn't hear of it , but I was totally embarrassed by everything The clothes I was wearing looked weird , I had no books or homework , and my backpack was gone . I had my life in that backpack ! The more I tried to fit in , the worse it got . Was I destined to be an outcast and a geek all my life ? That's what it felt like . I didn't want to grow up , change or have to handle life if it was going to be this way . I just wanted to curl up and die . I walked around school like a zombie . Everything felt surreal , and I wasn't sure what was going to happen . All the security I had known , from my old school , my friends , my house and my cat had all been ripped away अगले सोमवार के दिन मैं स्कूल गया । जब आग लगी थी , मैं वहीं पोशाक पहने हुए था जो उस सुबह को गिरजाघर में पहने हुए था , परंतु मेरे पास जूते नहीं थे । जब मैं अपना गृहकार्य कर रहा था तो मैंने उन्हें पैर से किक ( ठोकर ) मारकर एक तरफ कर दिया था । वे भी अन्य चीजों की भाँति आग की दुर्घटना का शिकार हो गए । अत : मुझे अपनी चाची से टेनिस के जूते उधार लेने पड़े । मैं स्कूल जाने के बदले घर क्यों नहीं ठहर सकता था । मेरी माँ इसे नहीं सुन सकेगी , परंतु मैं पूरी तरह से हर किसी वस्तु से शर्म महसूस कर रहा था । जो कपड़े मैं पहने हुए था विलक्षण लग रहे थे । मेरे पास कोई पुस्तक और गृहकार्य नहीं था और मेरा बैकपैक ( स्कूल का बैग ) भी खो गया था । उस बैकपैक में मेरा जीवन था । मैं जितना भी ठीक रहने की कोशिश करता उतना ही खराब होता जाता । मैं संपूर्ण जीवन को एक निर्वासित की तरह जीने के लिए नियति द्वारा विवश कर दिया गया था । मुझे कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ था । मैं बड़ा होना नहीं चाहता था अथवा इस प्रकार के जीवन को जीना नहीं चाहता था । मैं सिर्फ सिमटकर मरना चाहता था । मैं स्कूल में एक उदासीन की तरह घूमता था । प्रत्येक चीज अद्भुत लगती थी , और यह भी नहीं जानता था कि क्या घटित हो रहा था । सारी सुरक्षा जिन्हें मैं जानता था- मेरा पुराना स्कूल , मेरे दोस्त , मेरा घर और मेरी बिल्ली सब कुछ झपट लिया गया था ।




When I walked through what used to be my house after school that day , I was shocked to see how much damage there was- whatever hadn't burned was destroyed by the water and chemicals they had used to put out the . The only material things not destroyed were the photo albums , documents and some other personal items that my mother had managed to heroically rescue . But my cat was gone and my heart ached for her . There was no time to grieve . My mother rushed me out of the house . We would have to find a place to live , and I would have to go buy some clothes for school . उस दिन जब मैं स्कूल के बाद उस घर में गया जो हमारा था , मुझे यह देखकर धक्का लगा कि कितनी अधिक क्षति हुई थी - जो जला नहीं था वह पानी से नष्ट हो गया अथवा आग बुझाने में प्रयोग किए गए रसायनों द्वारा नष्ट हो गया । जो वस्तुएँ नष्ट नहीं हुईं वे मात्र फोटो एलबम , दस्तावेज तथा व्यक्तिगत वस्तुएँ थीं जिनको मेरी माँ ने वीरतापूर्वक बचा लिया था । परंतु मेरी बिल्ली चली गई और मेरा हृदय उसके लिए व्यथित था ।
दुःख को प्रकट करने का समय नहीं था । मेरी माँ ने मुझे जल्दी से घर से निकाला । हमें रहने के लिए घर भी ढूँढ़ना था और मुझे जाकर स्कूल के लिए कपड़े खरीदने थे ।


We had to borrow money from my grandparents because there were no credit cards , cash or even any identification to be able to withdraw money from the bank . Everything had gone up in smoke . That week the rubble that used to be our house was being cleared off the lot . Even though we had rented an apartment nearby , I would go over to watch them clear away debris , hoping that my cat was somewhere to be found . She was gone . I kept thinking about her as that vulnerable little kitten . In the early morning when I would disturb her and get out of bed , she would tag along after me , climb up my robe and crawl into my pocket to fall asleep . I was missing her terribly . It always seems that bad news spreads quickly , and in my case it was no different . Everyone in high school , including the teachers , was aware of my plight . I was embarrassed as if somehow I were responsible . What a way to start off at a new school ! This was not the kind of attention I was looking for .
हमें मेरे दादा - दादी से रुपये उधार लेने पड़े क्योंकि क्रेडिट कार्ड , नकदी तथा यहाँ तक कि बैंक से रुपये निकलवाने के लिए पहचान का कोई जुगाड़ नहीं था । सब कुछ धुएँ में उड़ गया था । उस सप्ताह ईंटो के वे टुकड़े जो कभी हमारा घर हुआ करते थे , हटाए जा रहे थे । फिर हमने पास में एक अपार्टमेंट किराए पर ले लिया । मैं उनको मलबे को हटाते हुए देखने के लिए जाता था इस आशा के साथ कि मेरी बिल्ली कहीं मिल जाएँ । वह चली गई थी । मैं उस कमजोर छोटी बिल्ली के बारे में सोचता रहा । सुबह जब में उसे छेड़ता था , तथा सोकर उठता तो वह मेरे पीछे - पीछे आती । मेरे लबादे में चढ़ जाती और मेरी जेब में सोने के लिए रेंगने लगती । मैं उसकी कमी भयंकर रूप से महसूस कर रहा था । यह हमेशा देखने को मिलता है कि बुरी खबर शीघ्र फैलती हैं तथा मेरे विषय में भी यह अलग नहीं था । हाईस्कूल में हर कोई यहाँ तक कि अध्यापक भी मेरी हालत को समझते थे । कहीं न कहीं मैं ही जिम्मेदार था । यह सोचकर मैं बहुत दु : खी था । एक नए स्कूल की शुरूआत का भला यह क्या तरीका था । मैं इस प्रकार के ध्यान की आशा नहीं कर रहा था । 

The next day at school , people were acting even more strange than usual . I was getting ready for gym class at my locker . People were milling around me , asking me to hurry up . I thought it strange , but in the light of the past few weeks , nothing would surprise me . It almost seemed that they were trying to shove me into the gym - then I saw why . There was a big table set up with all kinds of stuff on it , just for me . They had taken up a collection and bought me school supplies , notebooks , all kinds of different clothes jeans , tops , sweat suits . It was like Christmas . I was overcome by emotion . People who had never spoken to me before were coming up to me to introduce themselves . I got all kinds of invitations to their houses . Their genuine outpouring of concern really touched me . In that instant , I finally breathed a sigh of relief and thought for the first time that things were going to be okay . I made friends that day .
स्कूल में अगले दिन वे लोग विचित्र व्यवहार कर रहे थे जो पहले से अधिक विचित्र थी । मैं अपने लॉकर के पास व्यायामशाला की कक्षा में जाने के लिए तैयार हो रहा था । लोग मेरे चारों ओर निरुद्देश्य घूम रहे थे । तथा शीघ्रता करने के लिए कह रहे थे । मैंने इसे अद्भुत समझा , परंतु पिछले सप्ताहों से कोई भी वस्तु मुझे आश्चर्य में नहीं डालती थी । मुझे लगभग ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वे मुझे व्यायामशाला में जबरन धकेलना चाहते थे । वहाँ पर एक बड़ी मेज मेरे लिए रखी हुई थी जिस पर हर तरह का सामान रखा था । उनके पास एक संग्रह था जिसमें स्कूल सामान , नोटबुक , सभी प्रकार के कपड़े - जींस स्वेटर आदि थे , जो सब कुछ मेरे लिए खरीदा गया था । यह क्रिसमस के जैसा था । मैं भावुक हो गया था । जो व्यक्ति मुझसे कभी नहीं बोलते थे , वे सामने आए तथा परिचित होने लगे । मुझे उनके घर आने के हर तरह के निमंत्रण मिले । उनके वास्तविक भावात्मक बहाव ने मुझे छू लिया । उस वक्त , अंत में मैंने चैन की साँस ली और सोचा कि सभी वस्तुएँ ठीक होती जा रही हैं , उस दिन मैंने मित्र बनाए । 


A month later , I was at my house watching them rebuild it . But this time it was different - I wasn't alone . I was with two of my new friends from school . It took a fire for me to stop focusing on my feelings of insecurity and open up to all the wonderful people around me . Now I was sitting there watching my house being rebuilt when I realised my life was doing the same thing .
While we sat there on the curb , planning my new bedroom , I heard someone walk up to me from behind and say , " Does this belong to you ? " When I turned around to see who it was , couldn't believe my eyes . A woman was standing there holding my cat ! I leapt up and grabbed her out of the woman's arms . I held her close to me and cried into that beautiful orange fur . She purred happily . My friends were hugging me , hugging the cat and jumping around Apparently , my cat had been so freaked by the fire that she ran over a mile away . Her collar had our phone number on it , but our phones had been destroyed and disconnected . This wonderful woman took her in and worked hard to find out whose cat it was . Somehow , she knew this cat was loved and sorely missed . As I sat there with my friends and my cat curled up in my lap , all the overwhelming feelings of loss and tragedy seemed to diminish . I felt gratitude for my life , my new friends , and the kindness of a stranger and the loud purr of my beloved cat . My cat was back and so was I.
एक महीने बाद मैं , अपने घर को दुबारा बनते हुए देख रहा था । परंतु इस बार फर्क था- मैं अकेला नहीं था । मैं स्कूल के दो नये मित्रों के साथ था । अपनी असुरक्षा के भाव से अपना ध्यान हटाने तथा अपने आस - पास के लोगों से घुलने मिलने के लिए एक आग लगानी पड़ी । अब मैं वहाँ बैठा अपना नया घर बनता देख रहा था । तब मैंने महसूस किया कि मेरा जीवन भी वही काम कर रहा था अर्थात् उसका भी पुनर्निर्माण हो रहा था । जबकि हम वहाँ रुकावट पर बैठे मेरे नये शयन - कक्ष के विषय में सोच रहे थे , मैंने किसी को अपने पीछे से कुछ कहते हुए सुना , “ क्या यह तुम्हारी है ? " जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मैं अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पाया । एक औरत वहाँ मेरी बिल्ली को लिए खड़ी थी । मैं उछला और उसे महिला के बाजुओं से मैंने छीन लिया । मैं उसे अपने पास ले आया और उसके सुंदर नारंगी फर में मुँह छुपाकर रोया । उसने खुश होकर घुरघुराहट की । मेरे मित्र मुझसे तथा बिल्ली से लिपट गए तथा चारों तरफ उछल - कूद करने लगे । स्पष्ट है कि मेरी बिल्ली आग से असाधारण रूप से इतना डर गई थी कि एक मील दूर भाग गई थी । उसके कॉलर में हमारा टेलीफोन नंबर था , परंतु हमारा फोन नष्ट हो गया था । इस विचित्र महिला ने उसे उठाया और यह जानने का बहुत प्रयास किया कि यह बिल्ली किसकी थी । वह किसी - न - किसी प्रकार जानती थी कि इस बिल्ली को कोई बहुत प्यार करता था और बहुत याद करता था । जब मैं वहाँ अपने मित्रों के साथ बैठा था और मेरी बिल्ली मेरी गोद में ऐंठी हुई बैठी थी , पीड़ा व हानि की सभी प्रबल भावनाएँ समाप्त होती प्रतीत हो रही थी । मैंने नए मित्रों के प्रेम , एक अजनबी की दयालुता और मेरी प्यारी बिल्ली की ऊँची घुरघुराने की आवाज का आभार महसूस किया । मेरी बिल्ली वापस आ गई थी और मैं भी ।

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