The Ganga by pt. Nehru Complete explanation

                     



                         The Ganga 
Pt. Jawahar Lal Nehru, The Prime Minister of India, was the true builder of modern India. He was also a well known writer. His famous books are ‘The Discovery of India’, ‘Glimpes of The World History’ and ‘Autobiography’. He was a man of international repute.
प्रथम प्रधानमंत्री पंडित्त जवाहर लाल नेहरू आधुनिक भारत के वास्तविक निर्माता थे। वह लेखक के रूप मे भी जाने जाते हैं The Discovery of India’, ‘Glimpes of The World History’ और आत्मकथा उनकी प्रसिद्ध किताबें हैं। वह अन्तररष्टीय ख्याति प्राप्त वायक्ति थे।


                    
                                 Complete Novel
I have received so much love and affection from the Indian people that nothing that I to do can repay even  a small fraction of it and indeed there can be no repayment of so precious a thing as affection. Many  have been admired, some have been rewarded, but the affection of all classes of the Indian people has come to me in such abundant measure that I have been overwhelmed by it. I can only express the hope that in the remaining years I may live, I shall not be unworthy of my people and their affection
 मुझे भारतवासियों से इतना अधिक प्रेम और स्नेह मिला है कि मैं जो कुछ भी करूं इसका एक अंश भी नहीं चुका सकता और वास्तव में प्रेम जैसी अमूल्य वस्तु को झुकाया ही नहीं जा सकता। अनेक लोगों की प्रशंसा की गई है कुछ का सम्मान भी किया गया है परंतु भारत में रहने वाले लोगों लोगों सभी जातियों का इतना अधिक प्यार मुझे मिला है कि इसने मुझे भाव विभोर कर दिया है। मैं केवल आशा ही व्यक्त कर सकता हूंकि अपने जीवन के शेष वर्षों में मैं अपने लोगों तथा उनके प्यार के अयोग्य सिद्ध नहीं हो जाऊं

To my innumerable comrades and colleagues, I owe an even deeper debt of gratitude. We have  been joint partners in great undertakings  and have shared the triumph and sorrows which inevitably accompany them.
मैं अपने साथियों और सहकर्मियों का और भी अधिक कर्जदार हूं। हम महान कार्यों में इकट्ठे हिस्सेदार रहे हैं और इसमें अनिवार्य रूप से आने वाले सुख हो और दुखों के भागीदार रहे हैं।
When I die, I should like my body to be cremated, if I die in a foreign country, my body should be cremated there and my ashes sent to Allahabad. A small handful of these ashes should be thrown in the Ganga and the major portion of them disposed of in the manner indicated below. No part of these ashes should be retained or preserved.

जब मेरी मृत्यु हो तो मेरी इच्छा है कि मेरे शरीर का दाह संस्कार किया जाए। यदि मेरी मृत्यु विदेश में हो तो मेरा दाह संस्कार वही कर दिया जाए और मेरी आस्थियों इलाहाबाद भेज दी जाए। इन अस्थियों का मुट्ठी भर भाग गंगा में विसर्जित कर दिया जाएऔर अधिकांश भाग निम्नलिखित तरीके से विसर्जित किया जाए। इन अस्थियों के किसी भी भाग को बचाकर या सुरक्षित ना रखा जाए।

My desire to have a handful of my ashes thrown in the Ganga at Allahabad has no religious significance, so far as I am concerned. I have no religious sentiment in the matter. I have been attached to the Ganga and the Jamuna rivers in Allahabad ever since my childhood and, as I have grown older, this attachment has also grown.

मेरी इच्छा का कि मेरी अस्थियों का कुछ भाग इलाहाबाद में गंगा में विसर्जित कर दिया जाएकोई धार्मिक महत्व नहीं है। जहां तक मेरा संबंध है इस मामले में मेरी कोई धार्मिक भावना नहीं है। मैं अपने बचपन से ही इलाहाबाद में गंगा और यमुना नदियों सेजुड़ा रहा हूं और जैसे-जैसे मैं बड़ा होता गया यह हंसने भी बढ़ता गया है
I have watched their varying moods as the seasons changed and have often thought of the history  and myth and tradition and story that have become attached to them through the long ages and become part of their flowing waters
ऋतुओं के बदलने के साथ-साथ मैंने इसके बदलते हुए भाव को देखा है और प्रायः और उस इतिहास और पौराणिक कथा और परंपरा और संगीत और कथा के बारे में विचार किया है जो भी जो युगांतर से इसके साथ जुड़ गई हैं
The Ganga especially is the river of India, beloved of her people, round which are intertwined her racial memories, her hopes and fears, her songs of triumph, her victories and her defeats. She has been a symbol of India’s age-long culture and civilization, ever-changing, ever-flowing, and yet ever the same Ganga. She reminds me of the snow-covered peaks and the deep valleys of the Himalayas, which I have loved so much and of the rich and vast plains below, where my life and work have been cast.
गंगा विशेष रूप से भारत की नदी है और उसके लोगों की की प्रिय है। जिसके चारों ओर उन लोगों की जाती, यादें उनकी आशाएं, और भय उनके विजय, के गीत उनकी विजयेँ, और पराजय लिपटी हुई है। यह भारत की लंबी संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है । निरंतर बहती हुई और फिर भी वैसी ही गंगा है। यह मुझे याद दिलाती है हिमालया की उन गहरी घाटियों और बर्फ से ढकी हुई चोटियों की जिन्हें मैंने बहुत प्यार किया है और समुद्र तथा विशाल निचले मैदानों की जहां मेरा जीवन और कार्य ढला है।

Smiling and dancing in the morning sunlight, and dark and gloomy and full of mystery as the evening shadows fall; a narrow, show and graceful stream in winter and a vast roaring thing during the monsoon, broad bosomed  almost as the sea and with something of the sea’s power to  destroy, the Ganga has been to me a symbol and memory of the of the past of India, running into the present and flowing on to the great ocean of the future.
प्रायःसूर्य के प्रकाश में मुस्कुराती और नाचती हुई तथा संध्या काल के आने पर अंधकारमय और रहस्यपूर्ण, शीतकाल में संकुचित मंद एवं शोभा युक्त जलधारा और वर्षा ऋतु में एक विशाल गरजती हुई वस्तु लगभग सागर की तरह विशाल वक्षस्थल वाली और सागर जैसी विनाशक शक्ति रखने वाली गंगा मेरे लिए भारत के अतीत की प्रतीक और स्मृति रही है जो वर्तमान में से होकर भविष्य के विशाल सागर में प्रवेश कर जाती है



And though I have discarded much of past tradition and custom and an anxious that India should rid herself of all shackles that bind and constrain her and divide her people and suppress vast numbers of them and prevent the free development of the body and the spirit
और यद्यपि मैंने काफी प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों को छोड़ दिया है और मैं उत्सुक हूं कि भारत स्वयं को उन सब बेड़ियों से मुक्त कर ले जो उसे बांधती हैंऔर मजबूर करती हैंतथा उसके लोगों को विभाजित करती हैंऔर उसमें से असंख्य का दमन करती हैंऔर शरीर तथा आत्मा के स्वतंत्र विकास को रोकती हैं।

Though I seek all this yet I do not wish to cut myself off from that past completely. I am proud of that great inheritance that has been, and is, ours, and I am conscious that I too, like all of us, am a link in the unbroken chain which goes back to the dawn of history in the immemorial past of India.
यद्यपि मैं यह सब चाहता हूं फिर भी मैं स्वयं को संपूर्ण रूप से उस अतीत से अलग नहीं करना चाहता। मुझे उस महान विरासत पर गर्व है जो हमारी रही हैं और हमारी हैं  और मुझे ज्ञात है कि मैं भी सब की तरह स अटूट कड़ी का अंग हूं जो भारत के अति प्राचीन अतीत के इतिहास से आरंभ से जुड़ी हैं                                                                  The chain I would not break, for I treasure it and seek inspiration from it. And as a witness of this desire of mine and as mu last homage to India’s cultural inheritance, I am making this request that a handful of my ashes be thrown into the Ganga at Allahabad to be carried to the great ocean that washes India’s shores.
 मैं इस कड़ी को नहीं तोडूंगा क्योंकि मैं इसे बहुमूल्य समझता हूं और इससे प्रेरणा प्राप्त करता हूं और अपनी इस इच्छा तथा भारत की संस्कृतिक विरासत के प्रति मेरी श्रद्धांजलि के साक्षी के रूप में यह प्रार्थना कर रहा हूंकि मेरी मुट्ठी भर अस्थियां इलाहाबाद में गंगा में विसर्जित कर दी जाए जो उस विशाल सागर में चली जाएं जो भारत के समुद्री तटों को धोती हैं

The major portion of my ashes should, however, be disposed of otherwise. I want these to be carried high up into the air in an airplane and scattered from that height over the fields where the peasants of India toil, so that they might mingle with the dust and soul of India and become an indistinguishable part of India.
मेरी अस्थियोंके अधिकांश भाग का अन्य प्रकार से निपटारा किया जाए।मैं चाहता हूं कि इन्हें वायुयान से आकाश में ऊंचा ले जाया जाए और उस ऊंचाई से उन्हें हमारे खेतों में बिखेर दिया जाए जहां भारत के किसान कठिन परिश्रम करते हैंताकि मैं भारत की मिट्टी में मिल जाऊं और भारत का एक अभिन्न अंग बन जाऊं।
I have written this Will and Testament in New Delhi on the twenty-first day of June in the year Nineteen Hundred and Fifty-four.                                                      मैंने यह वसीयतनामानई दिल्ली में 21 जून 1954 को लिखा है

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