Socrates by Rhoda power lesson 4 full translated lesson


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Rhoda power is a popular English writter Who has written on classical, Social, and general subjects.



Complete Lesson ( socrates) 


Socrates lived in Athens about four hundred years before Jesus Christ was born. As a boy, he was ugly, undersized and had a flat nose and bulging eyes. His father was a poor stone-cutter, so he was always rather shabbily dressed.
ईसा; मसीह के जन्म से लगभग 400 वर्ष पहले सुकरात एथेंस में रहता था। बाल्यावस्था में वह कुरूप तथा छोटे कद का था।और उसकी नाक चपटी थी और उसकी आंखें बाहर की और उभरी हुई थी। उसका पिता एक निर्धन व्यक्ति था जो पत्थर काटने का कार्य करता था अतः वह सदैव फटे पुराने कपड़े पहनता था।

Like other boys of his age, he went to school, where the most important lessons were music and gymnastics. He also learned some science and mathematics and a little about the stars, but not nearly so much history and geography as children learn today. This strange little creature with a short neck and plain face was a thoughtful child. He watched his companions all the time and allowed very few things to escape his notice.
अपनी उम्र के अन्य लड़कों की तरह वह स्कूल जाता था जहां पर सबसे अधिक महत्वपूर्ण पाठ संगीत और व्यायाम था। उसने कुछ विज्ञान और गणित और बहुत थोड़ा सा ज्ञान नक्षत्रों के बारे में प्राप्त किया। किंतु उसने इतिहास और भूगोल के विषय में इतना नहीं पढा जितना आजकल के बच्चे पढ़ते हैं। यह विचित्र तथा छोटा बालक जिसकी गर्दन छोटी थी तथा जिसका चेहरा साधारण था, विचारशील था। वह प्रत्येक समय अपने साथियों के कार्य को ध्यानपूर्वक देखा करता था। और बहुत ही कम बातों को अपने निरीक्षण से बचने देता था अर्थात प्रत्यय बात को ध्यान पूर्वक देखता था




Socrates did not have a big house or fine furniture. He did not seem to want either wealth or beautiful possessions. As he grew older, he began to think very little of bodily comfort and pleasure. He gave his mind to all that was noble, honorable and just.
सुकरात के पास बड़ा मकान तथा अच्छा फर्निचर नहीं था। ऐसा प्रतीत होता था जैसे उसे ना तो धन की आवश्यकता हो और ना ही अच्छी वस्तुओं की। जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया वैसे-वैसे शारीरिक आराम तथा आनंद के विषय में  कम विचार करने लगा। उसने अपना सारा ध्यान उन बातों में लगा दिया जो श्रेष्ठ सम्मानित तथा न्याय पूर्ण थी

Socrates went around the town on foot and talked to people. The Athenians began to look for his familiar figure in the streets and to say to their friends, “Yes, that’s Socrates, come along and talk to him.” After sometime Socrates became famous as a teacher. He wandered along the roads and stood in the market places, talking to anyone who cared to greet him. 
सुकरात नगर में पैदल ही घूमता रहता था और लोगों से बातें करता रहता था। एथेंस के निवासी गलियों में उसकी परिचित शक्ल को ढूंढते रहते थे। और अपने मित्रों को कहा करते थेहां वह सुकरात ही है। आओ उससे बातें करें। कुछ समय के पश्चात सुकरात की प्रसिद्धि अध्यापक के रूप में हो गई अर्थात वह श्रेष्ठ अध्यापक समझा जाने लगा। वह सड़कों पर घूमता रहता था और बाजारों के मुख्य स्थानों पर खड़े होकर ऐसे किसी भी व्यक्ति से बातें करने लगता था जो उसको संबोधित करके अभिवादन करता था

His listeners were often confused after they had argued whit him or answered his questions, Socrates told his countrymen that everyone must learn to think for himself, so that by using his reason he would have the power to see what was right, just, true and beautiful, and so shape his own conduct.                
उससे बहस करने के बाद या उसके प्रश्नों का उत्तर देने के पश्चात उनसे बातें करने वाले व्यक्ति चकरा जाया करते थे। सुकरात ने अपने देश के निवासियों को बताया था। की हर एक मनुष्य को अपने विचार शक्ति को विकसित करना चाहिए ताकि बुद्धि के प्रयोग से ज्ञात हो सके कि कौन सी बात ठीक उचित सत्य एवं सम्मान पूर्ण हैऔर उसके आधार पर ही उसे अपने आचरण को ठीक करना चाहिए।




He wanted Athens to be a perfect state. He told everyone-both his pupils and his other followers – that this could only happen if every citizen educated his own mind to see what was right and noble. He believed that questioning and discussion would help them do this and so he was forever talking to them in the open streets.
वह एथेंस को आदर्श राज बनाना चाहता था। उसने शिष्यों तथा अनुयायियों में से प्रत्येक व्यक्ति को बताया कि यह तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपने मस्तिष्क को शुद्ध और श्रेष्ठ बातों को देखने के लिए शिक्षित करें। उसका विश्वास था की प्रश्न करने तथा वाद-विवाद करने से उसे इस कार्य में मदद मिलेगी और इसलिए ही वह सदैव लोगों से बात करने के लिए खुली गलियों में घूमता रहता था।

When Socrates was an old man, his fame had spread far and wide. The house of many a rich man opened its doors to him, for people felt honored to have him as their guest. By degrees, a special group of pupils gathered around him and followed him wherever he went. Among them was a young man called Plato, who treasured every word which his master uttered and in later years became as famous a teacher as Socrates himself.
जब सुकरात बुड्ढा हो गया तब उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। बहुत से अमीर व्यक्तियों के घरों के दरवाजे उसके लिए खुल गए क्योंकि लोग उसे अपना मेहमान बनाने में अपने आप को गौरवशाली समझते थे। थोड़े समय में ही शिष्यों का एक विशेष गुट उसके चारों ओर इकट्ठा होने लगा और जहां कहीं वह जाता था वे लोग उसके पीछे पीछे जाते थे। उसके शिष्यों में एक नवयुवक था जिसका नाम प्लेटो था। उसने अपने गुरु सुकरात के प्रत्येक शब्द को अपने हृदय में सम्मान पूर्वक संचित किया तथा कुछ वर्षों में ही सुकरात के समान प्रसिद्ध हो गया




But although many people loved the old man and delighted in his wisdom, there were some who did not approve of him. He taught that man’s own mind influenced his conduct more than the Gods. This seemed to some people a new and wicked idea.
यद्यपि बहुत से व्यक्ति उस बुड्ढे व्यक्ति से प्रेम करते थे और उसकी बुद्धिमानी पर प्रसन्नता प्रकट करते थे किंतु कुछ व्यक्ति ऐसी भी थे जो उसकी बातों को पसंद नहीं करते थे। उसने शिक्षा दी थी कि व्यक्ति का अपना मस्तिष्क उसके आधार पर देवी-देवताओं से अधिक प्रभाव डालता है। कुछ लोगों को सुकरात की शिक्षाएं नवीन तथा दुष्टता पूर्ण लगी

He said that there were higher and nobler deeds than making sacrifices to Athens and the other Gods of Greece, and many people thought that he was leading the young astray, questioning all that they had been taught to believe and filling their minds with doubt.                                                 उसने कहा था कि athine नामक देवी तथा अन्य देवताओं के सामने बलि चढ़ाने से भी अधिक अच्छे और भी काम है और बहुत से आदमियों का विचार था कि वह देश के नवयुवकों को पथभ्रष्ट कर रहा है। वह  उन सब बातों पर प्रश्न करता है जिन्हें स्वीकार करना उन्हे सिखाया गया था और वह इस प्रकार देश के नवयुवकों के मस्तिष्क में संदेह उत्पन्न कर रहा है।



The men who were governing Athens summoned Socrates to appear before them and to stand his trail His friends begged him to escape or to hide until the storm had blown over. But Socrates was no coward. He knew that he had done nothing wrong and that he had only taught what he believed to be just, true and honorable and so he went to the court. His clothes and shoes were dusty and travel-stained. But everyone knew that a noble heartbeat under the shabby garments.                                                         एथेंस पर शासन करने वाले व्यक्तियों ने सुकरात को आदेश दिया कि वह न्यायालय में उपस्थित होकर अपने मुकदमे की पैरवी करें। उसके मित्रों ने उससे निवेदन किया कि जब तक उसके विरुद्ध उठा हुआ तूफान समाप्त ना हो जाए तब तक वह या तो एथेंस से बाहर कहीं चला जाए या छिप जाए। किंतु सुकरात कायर नहीं था वह जानता था कि उसने कोई गलत कार्य नहीं किया है। और उसने उन लोगों को उसी बात की शिक्षा दी है जिसे वह उचित सत्य और सम्मानित समझता था। इसलिए वाह न्यायालय चल दिया। उसके कपड़े और जूते धूल से भरे हुए तथा गंदे थ। किन्ु प्रत्येक व्यक्ति जानता था कि इन फटे पुराने गंदे कपड़ों में एक श्रेष्ठ हिर्दय धड़कता है।

He made a powerful and dignified speech. He told the Athenians that they would gain nothing by taking away the last few years of his life, but that he was willing to die many deaths for what he believed to be right.                                                                            
उसने शक्तिशाली और गौरवपूर्ण भाषण दिया। उसने यूनान के रहने वाले व्यक्तियों से कहा कि उसके जीवनके अंतिम कुछ वर्ष लेकर उन्हें कोई लाभ नहीं होगा किंतु वह उन बातों के लिए जिन्हें वह ठीक समझता है प्रसन्नता पूर्वक कई बार मरने के लिए तैयार।


The judges listened to him questioned him and condemned him to death. The old man made no complaint. He leaned on his stick, looking around the crowded courtroom. Plato and his other pupils were there in court all the time. “No evil can happen to a good man,” he told them “either in life or after death, so be of good cheer. I have to go. The hour of my departure has arrived and we go our ways, I to die and you to live.”                                       जजों ने उसकी बातों को सुना उससे प्रश्न पूछे और अंत में मृत्यु की सजा दी न्यायालय के निर्णय पर उस बुड्ढे व्यक्ति सुकरात ने कोई शिकायत नहीं की। न्यायालय के भीड़ भरे कमरे में चारों ओर देखकर वह अपनी छड़ी पर झुक गया। प्लेटो और उसके अन्य शिष्य मुकदमे में हर समय उसके साथ थे। उसने उनसे कहा कोई भी बुराई किसी अच्छे व्यक्ति के साथ घटित नहीं हो सकती है ना तो इस जीवन में और ना मृत्यु के बाद इसलिए प्रसन्न रहो। मुझे जाना है। मेरे प्रस्थान का समय आ गया है और हम अपने मार्ग पर जाते हैं। मुझे मरना है और तुम्हें जीवित रहना है।
















Then the soldiers came and took him away to prison. His wife followed with his three children. Many of his favorite pupils were also with him. For a long time, they talked to him and he taught them many wise lessons which they treasured in their hearts. But all the time his friends knew that Socrates would die soon. They were sad. “For,” as Plato wrote, “he was like a father of whom we were being bereaved and we were about to pass the rest of our lives as orphans.”   तब सैनिक आए और उसे जेल खाने ले गए उसकी स्त्री और 3 बच्चों सहित उसके पीछे पीछे दौड़ी चली गई उनके प्रिय शिष्यों में से बहुत से उसके साथ थे। बहुत समय तक उन्होंने उससे बातें की और उनसे बहुत सी शिक्षाएं दी थी जो बुद्धिमानी से भरी हुई थी जिन्हें उन्होंने आदर के साथ अपने हृदय में संचित कर लिया परंतु उस संपूर्ण समय उसके मित्र जानते थे कि सुकरात की मृत्यु शीघ्र हो जाएगी। वह बहुत दुखी थे। क्योंकि जैसा कि प्लेटो ने लिखा था वह उन्हें पिता के समान मानता था जिन्हे उससे  वंचित किया जा रहा था और वह अपने शेष जीवन को अनाथों की तरह व्यतीत करने के निकट थे।

After the sun had set behind the tree-tops, the jailor came in and asked Socrates to prepare for death.
In Athens, when people were condemned to die, they were given a cup of poison. Socrates knew this and he nodded to the jailor who looked at him sadly saying “You, Socrates, whom I know to be the noblest and gentlest and best of all whoever came to this place, will not be angry with me when I ask you to drink the poison for others, and not I are the guilty cause,” Bursting into tears he went out and returned with a cup of poison.
वृक्षों की चोटियों के पीछे सूर्य अस्त होने के पश्चात जेलर अंदर आया और उसने सुकरात से मरने के लिए तैयार होने के लिए कहा। जब यूनान में लोगों को मृत्यु दंड दिया जाता था तब उन्हें पीने के लिए जहर का प्याला दिया जाता था। सुकरात इससे परिचित था और उसने अपना सिर हिलाकर जेलर को अपनी स्वीकृति प्रदान की जेलर ने दुखी होकर सुकरात की ओर देखते हुए कहा तुम सुकरात जिसे मैं उन सब व्यक्तियों में जो कभी इस स्थान पर आए हैं सर्वश्रेष्ठ मानता हूं मुझसे उस समय अप्रसन्न मत हो जाना जब मैं तुमसे जहर का प्याला पीने को कहु क्योंकि मैं तुम्हारी मृत्यु का कारण नहीं हूं बल्कि अन्य लोग हैं यह कह कर फूट-फूट कर रोता हुआ जेलर चला गया और कुछ समय के बाद जहर का प्याला लेकर पुनः आ गया।



“May the Gods prosper my journey from this to the other world,” said Socrates and lifted the cup to his lips. PARA – 13
“May the Gods prosper my journey from this to the other world,” said Socrates and lifted the cup to his lips.
His pupils tried to keep back their tears, but one sobbed aloud and this distressed the others and soon, the room was filled with the sound of weeping.                                                                         सुकरात ने कहा “देवता गण” इस संसार से दूसरे संसार तक की मेरी यात्रा सफल बनाएं यह कहकर सुकरात ने जहर के प्याले को उठाकर अपने होठों से लगा लिया। सुकरात के शिष्यों ने अपने आंसुओं को रोकने का प्रयत्न किया किंतु एक व्यक्ति ने जोर से सिसकी मारी और सभी व्यक्ति दुखी हो गए और शीघ्र ही कमरा रोने की आवाज से भर गया


Socrates paused, with the unfinished cup of poison in his hands. “What’s this strange noise ?” he asked. “I have heard that a man should die in peace. You mustn’t cry. Be silent and have patience.” He looked around, remembering something. “Crito,” he whispered to one of his pupils, “Can you do me a favor? I owe a cock to Aesculapius. Will you pay the debt ?”
“It shall be paid,” said Crito. “Is there anything else ?” He waited, but there was no answer, for “Socrates, the greatest of all the Greeks, was dead.”            अधूरे प्यालो को अपने हाथ में लेकर सुकरात रुक गया। उसने पूछा यह विचित्र शोर कैसा है? मैंने सुना है कि व्यक्ति को शांति पूर्वक मारना चाहिए तुम्हें चिल्लाना नहीं चाहिए। शांत रहो और धैर्य रखो कोई बात याद करते हुए उसने चारों ओर देखा। उसवने अपने शिष्यों में से एक से धीरे से कहा “क्राइटो” क्या तुम एक कृपा कर सकते मैंने इकुलापिअस देवता को एक मुर्गा भेंट करना है। क्या तुम मेरे कर्ज को चुका दोगे? क्राइटों ने कहा “तुम्हारा कर्ज अवश्य चुका दिया जाएगा। क्या कुछ और कहना है? उसने कुछ समय तक प्रतीक्षा किया किंतु उसे कोई उत्तर नहीं मिला क्योंकि यूनानी यों में सबसे महान व्यक्ति सुकरात का निधन हो चुका
Typed and Translated by akmal farooqui
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Unknown
admin
September 18, 2020 at 10:43 PM ×

Very nice and very good work 👍👍👍👍

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