IN THE KINGDOM OF FOOLS BY AK. RAMANUJAN HINDI EXPLANATION ENGLISH CLASS 9TH

 IN THE KINGDOM OF FOOLS  BY AK. RAMANUJAN
In the Kingdom of Fools , both the king and the minister were idiots . They didn't want to run things like other kings , so they decided to change night into day and day into night . They ordered that everyone should be awake at night , till their fields and run their businesses only after dark , and go to bed as soon as the sun came up . Anyone who disobeyed would be punished with death . The people did as they were told for fear of death . The king and the minister were delighted at the success of their project . One day a guru and his disciple arrived in the city . It was a beautiful city , it was broad daylight , but there was no one about . Everyone was asleep , not a mouse stirring . Even the cattle had been taught to sleep by day . The two strangers were amazed by what they saw
 around them and wandered around town till evening , when suddenly the whole town woke up and went about its nightly business .
 बेवकूफ़ों के समराज्य में राजा और मंत्री दोनों  मूर्ख थे । वे दूसरे राजाओं  की भाँति , कार्यों का संचालन नहीं करना चाहते थे । इसलिए उन्होंने दिन को रात में तथा रात को दिन में बदलने का निश्चय किया । इसलिए उन्होंने आदेश दिया कि हर व्यक्ति रात को जागेगा , खेतों पर काम करेगा तथा अँधेरा होने के बाद ही अपने घधे पर लगेगा तथा जैसे हो सूर्योदय होगा वह सोने का कार्य करेगा । कोई भी व्यक्ति जो आदेश का उल्लंघन करेगा उसे मौत की सजा मिलेगी । लोगों ने मौत के भय से ऐसा ही किया । राजा तथा मंत्री अपनी योजना की सफलता पर आनंदित थे । एक दिन एक गुरु व शिष्य नगर में पहुंचे । यह एक सुंदर शहर  था , विस्तृत दिन का प्रकाश था , परंतु कोई दिख नहीं रहा था । हर कोई सोया हुआ था , एक चूहा भी नहीं घूम रहा था । यहाँ तक कि पशुओं को भी दिन में सोना सिखाया गया था । दोनो  अजनबी व्यक्ति आश्चर्यचकित  हो गए ने जो कुछ चारों ओर देखा ,  तथा शाम तक भटकते रहे , तभी  अचानक संपूर्ण शहर  जाग गया तथा अपने रात्रि के कार्यों  में लग गया ।



The two men were hungry . Now that the shops were open , they went to buy some groceries . To their astonishment , they found that everything cost the same , a single duddu - whether they bought a measure of rice or a bunch of bananas , it cost a duddu . The guru and his disciple were delighted . They had never heard of anything like this . They could buy all the food they wanted for a rupee . दोनों व्यक्ति भूखे थे । अब चूँकि दुकाने खुल गई थी , वे खाने - पीने का सामान खरीदने गए । वे विस्मत हो गए , उन्हें हर एक चीज एक ही दाम में , एक डड्डू की कीमत में बिकते हुए मिली । चाहे उन्होंने चावल खरीदे या फिर केले का गुच्छा , सभी की कीमत केवल एक डड्डू थी । गुरु और शिष्य खुश हो गए । उन्होंने इस प्रकार की चीज के बारे में कभी नहीं सुना था । वे अपनी जरूरत की सभी चीजें एक रुपये में खरीद सकते थे ।



 When they had cooked and eaten , the guru realised that this was a kingdom of fools and it wouldn't be a good idea for them to stay there . " This is no place for us . Let's go , " he said to his disciple . But the disciple didn't want to leave the place . Everything was cheap here . All he wanted was good , cheap food . The guru said , “ They are all fools . This won't last very long , and you can't tell what they'll do to you next . " But the disciple wouldn't listen to the guru's wisdom . He wanted to stay . The guru finally gave up and said , " Do what you want . I'm going and left . " The disciple stayed on , ate his fill every day - bananas and ghee and rice and wheat , and grew fat like a street - side sacred bull .
 जब वे भोजन पका चुके तथा खा चुके तो गुरु को एहसास हुआ कि यह तो मूों का राज्य है वहाँ उनके साथ ठहरना सही विचार नहीं होगा । " हमारे लिए वहाँ कोई जगह नहीं है । चलो - चलें " , उसने अपने शिष्य से कहा । परंतु शिष्य उस स्थान को नहीं छोड़ना चाहता था । यहाँ सब कुछ सस्ता है । उसके जरूरत का भोजन अच्छा तथा सस्ता था । गुरु ने कहा , “ वे सभी मूर्ख है । यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा और कोई नहीं बता सकता कि वे तुम्हारे साथ क्या करेंगे । " परंतु शिष्य गुरु की बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह सुनने को तैयार न हुआ । वह वहीं ठहरना चाहता था । अंत में गुरु ने प्रयास छोड़ दिया और बोला , " जो तुम चाहते हो करो । मैं जा रहा हूँ " , वह चला गया । शिष्य रुक गया , पूरे दिन - भरपेट केला , घी , चावल तथा गेहूँ खाता रहता तथा गलियों में घूमने वाले पवित्र सांड की तरह मोटा हो गया ।



 One bright day , a thief broke into a rich merchant's house . He had made a hole in the wall and sneaked in , and as he was carrying out his loot , the wall of the old house collapsed on his head and killed him on the spot . His brother ran to the king and complained , " Your Highness , when my brother was pursuing his ancient trade , a wall fell on him and killed him . This merchant is to blame . He should have built a good , strong wall . You must punish the wrongdoer and compensate the family for this injustice . "
 एक प्रकाश वाले दिन , एक चोर ने किसी अमीर व्यक्ति के घर में सेध लगा दी । उसने दीवार में छेद कर दिया तथा चुपके से घुस गया तथा जब लूट का माल लेकर निकल रहा था , उस पुराने घर की दीवार उसके सिर पर ढह गई तथा उसी स्थान पर उसकी मौत हो गई । उसका भाई भागकर राजा के पास पहुँचा तथा शिकायत की , “ सरकार " मेरा भाई पुराना धंधा कर रहा था , उसके ऊपर दीवार गिर गई तथा वह मर गया । इसके लिए व्यापारी दोषी है । उसे एक अच्छी तथा मजबूत दीवार बनवानी चाहिए थी । आप इस गलत कार्य करने वाले व्यक्ति को अवश्य दंड दें तथा मेरे परिवार को इस अन्याय के लिए क्षति की भरपाई करें ।



 " The king said , " Justice will be done . Don't worry , " and at once summoned the owner of the house . When the merchant arrived , the king questioned him . " What's your name ? " " Such and Such , Your Highness . " " Were you at home when the dead man burgled your house ? "
[08:56, 6/19/2020] Akmal: " Yes , My Lord . He broke in and the wall was weak . It fell on him . " The accused pleads guilty Your wall killed this man's brother . You have murdered a man . We have to punish you . " Lord , " said the helpless merchant , " I didn't put up the wall . It's really the fault of the man who built the wall . He didn't build it right . You should punish him . " Who is that ? " " My Lord , this wall was built in my father's time . I know the man . He's an old man now . He lives nearby . " The king sent out messengers to bring in the bricklayer who had built the wall . They brought him , tied hand and foot . You there , did you build this man's wall in his father's time ? " Yes , My Lord , I did . " What kind of a wall is this that you built ? It has fallen on a poor man and killed him . You've murdered him . We have to punish you by death . "
 राजा बोला , “ न्याय मिलेगा । चिंता मत करो " , और तुरंत उसने उस घर के स्वामी को बुला लिया । जब व्यापारी हाजिर हुआ तो राजा ने उससे प्रश्न किया , “ तुम्हारा क्या नाम है ? " " अमुक , अमुक , हुजुर । " " जब उस मृत व्यक्ति ने आपके घर में सेंध लगाई तो क्या तुम घर पर ही थे ? " “ जी हाँ , महाराज । उसने दीवार में छेद किया तथा दीवार कमजोर थी । यह उस पर गिर गई । " “ आरोपी अपना अपराध स्वीकार करता है । तुम्हारी दीवार ने इस आदमी के भाई की जान ले ली है । तुमने एक आदमी की हत्या की है । हमें तुम्हें दंड देना है । " “ हुजूर , असहाय व्यापारी ने कहा , मैंने दीवार नहीं बनाई । यह वास्तव में उस व्यक्ति का दोष है , जिसने इस दीवार को बनाया । उसने इसे ठीक से नहीं बनाया । उसे दंड देना चाहिए । " " वह कौन है ? " “ हुजूर , यह दीवार मेरे पिता के समय बनाई गई थी । मैं संबंधित व्यक्ति को जानता हूँ । अब वह एक वृद्ध व्यक्ति है । वह पास में ही रहता है । " राजा ने अपने संदेशवाहकों को उस राजमिस्त्री को पकड़ लाने के लिए भेजा जिसने दीवार बनाई थी । संदेशवाहक उसके हाथ - पाँव बाँधकर ले आए । " तुम थे , क्या तुमने इनके पिता के समय इस व्यक्ति की दीवार बनाई थी । " " हाँ , मेरे हुजूर , मैंने बनाई थी । " “ यह दीवार तुमने किस प्रकार की बनाई थी ? वह एक गरीब व्यक्ति पर गिर पड़ी तथा उसकी जान ले ली । तुमने उसकी हत्या की है । हमें तुम्हें मृत्यु दंड देना
 होगा । "


 Before the king could order the execution , the poor bricklayer pleaded , “ Please listen to me before you give your orders . It's true I built this wall and it was no good . But that was because my mind was not on it . I remember very well a dancing girl who was going up and down that street all day with her anklets jingling , and I couldn't keep my eyes or my mind on the wall I was building .
 You must get that dancing girl I know where she lives . " " You're right . The case deepens . We must look into it . It is not easy to judge such complicated cases . Let's get that dancer , wherever she is . " The dancing girl , now an old woman , came trembling to the court " Did you walk up and down that street many years ago , while this poor man was building a wall ? Did you see him ? " " Yes , My Lord , I remember it very well . " " So you did walk up and down , with your anklets jingling . You were young and you distracted him , so he built a bad wall . It has fallen on a poor burglar and killed him You've killed an innocent man . You'll have to be punished . " इससे पूर्व राजा का आदेश लागू हो , बेचारे राज - मिस्त्री ने निवेदन किया , " अपना आदेश सुनाने से पूर्व कृपया मेरी बात सुन लें । यह सच है कि मैने ही वह दीवार बनाई थी और वह मजबूत नहीं बनी । मेरा मन उस समय अपने काम में नहीं था । मुझे उस नर्तकी का ही भलीभांति स्मरण है जो सारे दिन अपनी पायल झनझनाती सड़क पर ऊपर - नीचे आती जाती रहती थी तथा मैं अपनी आँखें तथा मन उस दीवार पर स्थिर न रख सका जो मैं बना रहा था ? आप उस नर्तकी को बुला ले । मैं जानता हूं वह कहाँ रहती है । " तुम ठीक कहते हो मामला गंभीर होता जा रहा है । हमें इसकी तह तक जाना होगा । ऐसे जटिल मामलों को निपटाना सरल नहीं होता । वह नर्तकी जहाँ भी हो , उसे बुलाओ । ” नर्तकी जो अब एक वृद्ध औरत हो चुकी थी भय से कांपती हुई कोर्ट में आई । " क्या कई साल पहले जब यह गरीब व्यक्ति दीवार बना रहा था , तुम्हीं उस गली में ऊपर - नीचे घूम रही थी , क्या तुमने उसे देखा था ? ' “ जी हाँ , सरकार , मुझे भली भांति स्मरण है । " " अर्थात तुम अपनी पायल झनकारती ऊपर नीचे टहल रही थी । तुम जवान थी और तुमने उसका ध्यान काम से विमुख कर दिया , इसलिए उसने खराब दीवार बना दी । वह दीवार एक गरीब चोर पर गिर गई तथा उनकी जान ले ली । तुमने एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की है । तुम्हे दंड मिलना ही चाहिए । "
[09:01, 6/19/2020] Akmal: She thought for a minute and said, "My Lord, wait. I know now why I was walking up and down that street. I had given some gold to the goldsmith to make some jewellery for me. He was a lazy scoundrel. He made so many excuses, said he would give it now and he would give it then and so on all day. He made me walk up and down to his house a dozen times. That was when this bricklayer saw me. It's not my fault, My Lord, it's the damned goldsmith's fault." "Poor thing, she's absolutely right," thought the king, weighing the evidence. "We've got the real culprit at last. Get the goldsmith, wherever he is hiding. At once!"
[09:02, 6/19/2020] Akmal: उसने ( नर्तकी ने ) एक मिनट सोचा और बोली , “ सरकार प्रतीक्षा करें । मुझे अब स्मरण आया कि मैं उस गली में क्यों आ - जा रही थी । मैंने एक सुनार को आभूषण बनाने के लिए कुछ सोना दिया था । वह आलसी और दुष्ट था । उसने अनेक बहाने बनाए , बोला कि आज आभूषण देगा कुछ समय बाद देगा , पूरे दिन यही करता रहा । उसने मुझे दर्जनों बार अपने घर बुलाया । तभी इस मिस्त्री ने मुझे देखा था । यह मेरा दोष नहीं है । सरकार दोष तो उस दुष्ट सुनार का है । " “ बेचारी महिला , वह बिल्कुल ठीक कह रही है । " राजा ने गवाह का मापांकन करके सोचा । अंत में हमने असली अभियुक्त पकड़ लिया । उस सुनार को बुलाओ , वह जहाँ कहीं भी छिपा है । फौरन बुलाओ । " The king's bailiffs searched for the goldsmith , who was hiding in a corner of his shop . When he heard the accusation against him , he had his own story to tell . My Lord , " he said , " I'm a poor goldsmith . It's true I made this dancer come many times to my door . I gave her excuses because I couldn't finish making her jewellery before I finished the rich merchant's orders . They had a wedding coming , and they wouldn't wait . You know how impatient rich men are ! " Who is this rich merchant who kept you from finishing this poor woman's jewellery , made her walk up and down , which distracted this bricklayer , which made a mess of his wall , which has now fallen on an innocent man and killed him ? Can you name him ? "
 राजा के कानून अधिकारी ने सुनार की खोज कर ली जो अपनी दुकान के कोने में छिपा बैठा था । जब उसने अपने खिलाफ आरोप सुना तो उसने अपनी कहानी सुनाई । “ महाराजा ” वह बोला , “ मैं तो एक गरीब सुनार हूँ यह सत्य है कि मैंने नर्तकी को अपने दरवाजे पर कई बार आने पर विवश किया । मैंने उसे बहाने बनाकर टाल दिया था क्योंकि मै उसके आभूषण तब तक नहीं बना सकता था जब तक मैं एक धनी व्यापारी का आर्डर पूरा न कर लेता । उनके यहाँ शादी होने जा रही थी तथा लोग इंतजार नहीं कर सकते थे । तुम जानते हो कि अमीर लोग कितने अधीर होते हैं । " " वह अमीर व्यक्ति कौन है जिसने तुम्हें बेचारी औरत के आभूषण बनाने से रोके रखा , उसे गली में आने जाने के लिए बाध्य किया । जिससे राज - मिस्त्री का ध्यान इतना भटक गया था , कि उसने दीवार खराब कर दी और जो एक बेकसूर व्यक्ति पर गिर पड़ी तथा उसके प्राण ले लिए ? क्या तुम उसका नाम बता सकते हो ? "




 The goldsmith named the merchant , and he was none other than the original owner of the house whose wall had fallen . Now justice had come full circle , thought the king , back to the merchant . When
 he was rudely summoned back to the court , he arrived crying , " It wasn't me but my father who ordered the jewellery ! He's dead ! I'm innocent ! "
सुनार ने व्यापारी का नाम बताया जो घर के असली मालिक के अलावा दूसरा कोई व्यक्ति नहीं था जिसके घर की दीवार गिर गई थी । अब न्याय अपने अंतिम चक्र पर जा पहुंचा है , राजा ने सोचा , अपराधी वही व्यापारी निकला । जब उसे निर्दयतापूर्वक राजदरबार में वापस बुलाया गया , वह चिल्लाता हुआ पहुँचा , “ वह व्यक्ति मैं नहीं हूँ जिसने आभूषणों का आर्डर दिया था । वह मेरे पिता थे । उनका देहांत हो चुका है । मैं निरपराध हूँ ।



' But the king consulted his minister and ruled decisively . " It's true your father is the true murderer . He's dead , but somebody must be punished in his place . You've inherited everything from that criminal father of yours , his riches as well as his sins . I knew at once , even when I first set eyes on you , that you were at the root of this horrible crime . You must die . " And he ordered a new stake to be made ready for the execution . As the servants sharpened the stake and got it ready for the final impaling of the criminal , it occurred to the minister that the rich merchant was somehow too thin to be properly executed on the stake . He appealed to the king's common sense . The king too worried about it . " What shall we do ? " he said , when suddenly it struck him that all they needed to do was to find a man fat enough to fit the stake . The servants were immediately sent all over the town looking for a man who would fit the stake , and their eyes fell on the disciple who had fattened himself for months on bananas and rice and wheat and ghee . " What have I done wrong ? I'm innocent . I'm a sanyasi ! " he cried .
परंतु राजा ने अपने मंत्री से सलाह को तथा निर्णय दे दिया- “ यह सच है कि तुम्हारे पिता असली हत्यारे हैं । वे मर चुके हैं , परंतु उनकी जगह किसी को तो दंड मिलना ही चाहिए । तुमने अपने अपराधी पिता की संपत्ति विरासत में पाई थी , उनकी संपत्ति व उनके याप भी । जब मैंने पहली नजर में तुम्हें देखा था तो मुझे फौरन पता चल गया था कि तुम निर्मम अपराध की जड़ हो । तुम्हें मारना होगा ” राजा ने फांसी देने के लिए एक खूटी तैयार करवाने का आदेश दिया । नौकर खूटी को नुकीली बना रहे थे तथा अपराधी को सूली पर चढ़ाने हेतु तैयार किया गया तो मंत्री को लगा कि धनी व्यापारी इतना डुबला - पतला है कि वह सूली पर अच्छी तरह फिट नहीं हो सकता है । उसने राजा की सहब बुद्धि पर निवेदन किया । राजा बहुत अधिक चिंतित हो गया । " अब हम क्या करेंगे ? " उसने कहा , जब अकस्मात उसे लगा कि वह किसी मोटे व्यक्ति की तलाश करें जो सूली पर फिट आ जाए । कर्मचारियों को नगर में तुरंत सूली पर फिट आने वाले व्यक्ति की तलाश में चारो तरफ भेजा गया , और
 उन लोगों की दृष्टि उस शिष्य पर पड़ी जो महीनों तक केले , चावल , गेहूँ तथा बी खाकर मोटा हो गया था । " मैंने क्या गलत किया है ? मैं निदोष हूँ । मैं एक सन्यासी हूँ ! " वह चिल्लाया । "



 That may be true . But it's the royal decree that we should find a man fat enough to fit the stake , " they said , and carried him to the place of execution . He remembered his wise guru's words : " This is a city of fools . You don't know what they will do next . " While he was waiting for death , he prayed to his guru in his heart , asking him to hear his cry wherever he was . The guru saw everything in a vision , he had magic powers , he could see far , and he could see the future as he could see the present and the past . He arrived at once to save his disciple , who had got himself into such a scrape through love of food . As soon as he arrived , he scolded the disciple and told him something in a whisper . Then he went to the king and addressed him , " O wisest of kings , who is greater ? The guru or the disciple ? " " Of course , the guru . No doubt aboutit . Why do you ask ? " " Then put me to the stake first . Put my disciple to death after me . "
यह सच हो सकता है । परंतु यह तो शाही आदेश है कि हम ऐसे मोटे व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं जो सूली पर फिट हो जाए " , वे बोले , तथा उस शिष्य को सूली के पास ले गए । शिष्य को अपने गुरु के शब्द स्मरण आ गए ; " यह मूों की नगरी है । तुम नहीं जानते कि ये अगले क्षण क्या करेंगे ? " जब वह अपनी मौत का इंतजार कर रहा था , उसने दिल से गुरु का स्मरण किया , उसने प्रार्थना की वह जहाँ कहीं भी हों उसकी पुकार सुने । गुरु ने सब कुछ दृश्य में देख लिया , उनमें जादुई शक्तियाँ थीं , उनमे दिव्य दृष्टि थी तथा वह भविष्य को भी देख सकते थे जैसे कि वर्तमान तथा भूतकाल को । वह अपने शिष्य की रक्षा हेतु तुरंत आ पहुँचे , जो अपने भोजन की लालसा के कारण ऐसी मुसीबत में फंस गया था । ज्योहि वे पहुंचे , उन्होंने अपने शिष्य को डाँटा फटकारा तथा धीरे से उससे कुछ कहा । फिर वे राजा के पास गए व बोले , " बुद्धिमान राजाओं में श्रेष्ठ , दोनों में कौन बड़ा है ? गुरु या चेला ? " निश्चय ही , गुरु । इसमें कोई संदेह नहीं है । तुम क्यों पूछते हो ? " तब आप मुझे पहले सूली पर लटकाएँ । मेरे शिष्य को मेरे बाद सूली पर चढ़ाएँ । "



When the disciple heard this , he understood and began to clamour , " Me first ! You brought me here first ! Put me to death first , not him ! " The guru and the disciple now got into a fight about who should go first . The king was puzzled by this behaviour . He asked the guru , " Why do you want to die ? We chose him because we needed a fat man for the stake . "
 " You जब शिष्य ने यह सुना , वह समझ गया और कहने लगा , “ पहले मुझे फाँसी दे दो ! सबसे पहले तुम मुझे लाए हो ! उन्हें नहीं , बल्कि मुझे पहले मृत्युदंड दें । गुरु तथा शिष्य इस बात पर झगड़ पड़े कि कौन पहले मृत्यु का वरण करे । राजा इस व्यवहार को देखकर हैरान था । उसने गुरु से पूछा , “ आप मरना क्यों चाहते हैं ? " हमने तो उसे चुना था क्योंकि सूली पर चढ़ाने के लिए उपयुक्त मोटा व्यक्ति चाहिए था । " “ आप मुझसे ऐसे प्रश्न न करें । पहले मुझे सूली पर चढ़ाएँ । ” गुरु ने उत्तर दिया । “ क्यों ? इसमें कुछ रहस्य है । बुद्धिमान व्यक्ति की भाँति मुझे भी समझाओ ।



 " Will you promise to put me to death if I tell you ? " asked the guru . The king gave him his solemn word . The guru took him aside , out of the servants ' earshot , and whispered to him , " Do you know why we want to die right now , the two of us ? We've been all over the world but we've never found a city like this or king like you . That stake is the stake of the god of justice . It's new , it has never had a criminal on it . Whoever dies on it first will be reborn as the king of this country . And whoever goes next will be the future minister of this country . We're sick of our ascetic life . It would be nice to enjoy ourselves as king and minister for a while . Now keep your word , My Lord , and put us to death . Me first , remember ? " The king was now thrown into deep thought . He didn't want to lose the kingdom to someone else in the next round of life . He needed time . So he ordered the execution postponed to the next day and talked in secret with his minister . " It's not right for us to give over the kingdom to others in the next life . Let's go on the stake ourselves and we'll be reborn as king and minister again . Holy men do not tell lies , " he said , and the minister agreed .
 “ क्या आप यह वचन देते हैं कि यदि मैं आपको वह रहस्य बता दूं तो आप मुझे मृत्यु दंड दे देंगे ? गुरु ने पूछा । राजा ने उसे पवित्र वचन दे दिया । गुरु उसे एक तरफ ले गया जहाँ नौकर - चाकर उनकी बात न सुन सके और वह फुसफुसाया " क्या आप जानते हैं , हम अभी क्यों मरना चाहते हैं , हम दोनो ही ? हम पूरी दुनिया का चक्कर लगा चुके हैं , परंतु हमें आपके जैसी नगरी अथवा राजा नहीं मिला । आपकी बनाई गई सूली ईश्वर के न्याय की सूली है । यह नई है , इस पर किसी अपराधी को अभी तक मृत्युदंड नहीं दिया गया है । जो भी व्यक्ति इस पर पहले मरेगा वह देश का भावी राजा होगा और जो उसके बाद सूली पर चढ़ेगा वह देश का भावी मंत्री होगा । हम अपने संन्यासी जीवन से परेशान हो चुके है । कुछ दिनो तक हम राजा तथा मंत्री बनने का आनंद लेना चाहते हैं । अब आप अपना वचन पूरा करें , सरकार , फाँसी दे दो । स्मरण रहे पहले मुझे ? " राजा गंभीर विचार में खो गया । वह नहीं चाहता था कि अगले जन्म में कोई दूसरा व्यक्ति उसके राज्य का स्वामी बन जाए । उसे विचार करने हेतु कुछ समय की आवश्यकता थी । इस कारण उसने फाँसी की सजा को अगले दिन संपन्न करने का आदेश दे दिया तथा अपने मंत्री से गुपचुप मंत्रणा की । अगले जन्म में हमारे लिए यह उचित नहीं होगा कि अपना राज्य अन्य लोगों को सौंप दें । आओ हम स्वयं ही सूली पर चढ़ जाएँ तथा हम राजा व मंत्री के रूप में पुन : जन्म लेंगे । महात्मा लोग झूठ नहीं बोलते " , उसने कहा , तथा मंत्री सहमत हो गया ।

 So he told the executioners , “ We'll send the criminals tonight . When the first man comes to you , put him to death first . Then do the same to the second man . Those are my orders . Don't make any mistake . " That night , the king and his minister went secretly to the prison , released the guru and the disciple , disguised themselves as the two , and as arranged beforehand with loyal servants , were taken to the stake and promptly executed . इस प्रकार उसने अपने कार्मिकों से बोला , “ हम आज की रात अपराधियों को भेजेंगे । जैसे ही पहला आदमी आपके पास पहुँचे उसे मार देना । दूसरे आदमी के साथ भी वही चीज करना । ये मेरे आदेश है । कोई गलती मत करना । ” उस रात राजा तथा मंत्री चुपके से कारागार में पहुँचे , उन्होंने गुरु तथा शिष्य को मुक्त कर दिया , दोनों ने गुरु और शिष्य का भेष बना लिया तथा अपने निष्ठावान नौकरों के साथ जिस प्रकार पहले से व्यवस्था कर रखी थी , उन्हें सूली पर ले जाया गया तथा फौरन फाँसी दे दी गई ।

When the bodies were taken down to be thrown to crows and vultures the people panicked . They saw before them the dead bodies of the king and the minister . The city was in confusion . All night they mourned and discussed the future of the kingdom . Some people suddenly thought of the guru and the disciple and caught up with them as they were preparing to leave town unnoticed . " We people need a king and a minister , " said someone . Others agreed . They begged the guru and the disciple to be their king and their minister . It didn't take many arguments to persuade the disciple , but it took longer to persuade the guru . They finally agreed to rule the kingdom of the foolish king and the silly minister , on the condition that they could change all the old laws . From then on , night would again be night and day would again be day , and you could get nothing for a duddu . It became like any other place .
जब उनके शवों को कौवों तथा गिद्धों को खिलाने के लिए सूली से उतारा गया तो लोग व्यथित हो गए । उन्हें अपने सामने मृत राजा व मंत्री के शव दिखाई पड़े । पूरा शहर उलझन या व्याकुलता में था । सारी रात उन्होंने विलाप किया तथा भावी राज्य के बारे में चर्चा की । कुछ लोगों को अकस्मात् गुरु तथा शिष्य की याद आई और उन दोनों को पकड़ लिया गया जब वे गुप्त रूप से नगर से बाहर चले जाने वाले थे । “ हम लोगों को एक राजा तथा एक मंत्री की आवश्यकता है " , एक व्यक्ति ने कहा और अन्य सहमत हो गए । उन्होंने गुरु तथा शिष्य से प्रार्थना की कि आप हमारे राजा तथा मंत्री बन जाएँ । उन्हें शिष्य को मनाने में तर्क नहीं करना पड़ा परंतु गुरु को सहमत करने में काफी समय लगा । अंत में वे दोनों मूर्ख राजा और मंत्री के राज्य पर शासन करने को इस शर्त पर तैयार हो गए कि उन्हें सभी पूराने कानूनों को बदलने का अधिकार होगा । तभी से यह तय हो गया कि पुन : रात , रात रहेगी तथा दिन , दिन रहेगा और आपको एक डड्डू के बदले कुछ नहीं मिलेगा । वह राज्य भी अब किसी अन्य स्थान की तरह हो गया ।
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Unknown
admin
December 22, 2023 at 5:43 AM ×

very thanks bro

Congrats bro Unknown you got PERTAMAX...! hehehehe...
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