The Enchanted Pool by C.R Gopalachari hindi explanation




About the Author                                                                          

Chakravarti Rajagopalachari (C. Rajagopalachari; 10 December 1878 – 25 December 1972), informally called Rajaji or C.R., was an Indian,politician, independence activist, lawyer, writer, historian and statesman.      

  The Enchanted Pool           

Yudhishthira waited for his brothers in anxiety and thirst. "Can they have been subjected to a curse or are they still wandering about in the forest in search of water? Can they have fainted or died of thirst? "Unable to bear these thoughts, and driven by an overpowering thirst,he gave-up waiting and started out to look for his brothers and the pool hoping that he might find them.

युधिष्ठिर अपने भाइयों की प्रतीक्षा चिंता और प्यास से कर रहे थे। क्या बे किसी श्रापके से ग्रस्त हो गए हैं या अभी पानी की तलाश में जंगल में इधर उधर भटक रहे हैंक्या वे मूर्छित हो सकते हैंया प्यास के कारण मर सकते हैं?इस प्रकार के विचारों को ना सह सकने के कारण तथा बहुत तेज प्यास से मजबूर होकर उन्होंने अपने भाइयों की प्रतीक्षा करना छोड़ दिया।और इस आशा के साथ कि वे अपने भाइयों को कहीं ना कहीं खोज लेंगे क  अपने भाइयों तथा तालाब का पता लगाने के लिए चल पड़े।

Yudhishthira proceeded in diction his brothers had taken and kept on walking through tracts full of wild beat and spotted dear and big forest birds till he came upon a beautiful green meadow, around a pool pf clear water. But when when he saw his brothers lying there like flagpoles,unable to restrain his grief, he lifted his voice and wept .

युधिष्ठिर उस दिशा में आगे बढ़े जिस दिशा में उनके भाई गए हुए थे ।और वे जंगली भालूचितकबरा हिरनतथा बड़े-बड़े जंगली पक्षियों से भरे हुएके क्षेत्र को पार करते हुए जंगली क्षेत्र में चलते रहे जब तक कि वह साफ पानी के एक तालाब के चारों ओर फैले हुए घास के मैदान में नहीं पहुंच गए। किंतु जब उन्होंने अपने भाइयों को लट्ठों के समान पड़े हुए देखा तो वे अपने दुख पर नियंत्रण ना कर सके और तेज आवाज में जोर जोर से रोने लगे।

he touched the faces of Bhima and Arjun, as they lay so still and silent,and mourned:"was this to be the end of all our vows? just when out exile is about to  end,you have been taken away. Even the Gods have forsaken me in my misfortune. 

जैसे ही उन्होंने भीम और अर्जुन के चेहरों को छुआ जो उस समय शांत और निर्जीव पड़े हुए थे।
उन्होंने विलाप करना आरंभ कर दिया। उन्होंने कहा क्या हमारी प्रतिज्ञा ओं का यही अंत होना थाठीक उसी समय जब हमारा वनवास समाप्त होने वाला था” तुम मुझसे छीन लिए गए हो।  यहां तक कि भगवान ने भी मेरे बुरे समय में मेरा साथ छोड़ दिया
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As he looked at their mighty limbs, now so helpless, he sadly wondered who could have been powerful enough to kill them. Then he too descended into pool, drawn to the water by an overpowering thirst. At once the voice without form warned.

जब उन्होने उनकी शक्तिशाली  भुजाओं को देखाजोकि अब कितना असहाय  थेतब उन्हें दुःख भरा आश्चर्य प्रकट किया  की कौन इतना शक्तिशाली  हो सकता हैजिसने  इन्हें मार दिया हैतब बहुत प्यास के कारण वह भी तालाब मे पानी पीने के लिए उतरे। तुरंत आदिरीश्य आवाज ने उनको चेतावनी दिया

“Your brothers died because they did not heed mu words. They tried to drink water without answering my questions. Do not follow them. Answer my questions first and then you can quench your thirst. This pool belongs to me.”
तुम्हारे भाई मर गए क्योंकि उन्होंने मेरी शब्दों  पर ध्यान नहीं दिया और बिना मेरे प्रश्नों का उत्तर दिए हुए पानी पीने की कोशिश की उनकी समान मत करो पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दोउसके बाद तुम अपनी प्यास बुझा सकते हो यह तालाब मेरा है |

It did not take Yudhishthira a moment to understand that these could be no other than the words of a Yaksha and guessed what had happened to his brothers. It took him no time to see a possible way of bringing them back to life. He said to the bodiless voice: “Please ask your questions.”

युधिष्ठिर को यह समझते देर नहीं लगी की यह यक्ष के अतिरिक्त और किसी के शब्द नही हो सकता और उन्होंने अनुमान लगा लिया की मेरे भाइयों के साथ क्या हुआ होगा और उन्हें पुनः जीवित कराने की संभावित विधि समझने मे देर नही लगी है तब उन्होंने उस अदृश्य आवाज से कहा : कृपया अपने प्रश्न पूछिए” |

The voice put questions rapidly one after another.
“What rescues man in danger?”
“Courage”
“By the study of which science does man become wise?”
“Not by studying any – ‘Shastra’ does man become wise. It is by association with the great in wisdom that he get wisdom.”
The Yaksha asked, “What is swifter than the wind?”
“Mind.”

तब उस आवाज ने एक के बाद एक लगातार प्रश्न पूछना शुरू कर दिया |
खतरे में इन्सान को क्या बचाता है ?”
साहस
कौनसा ग्रन्थ पढ़कर इन्सान बुद्धिमान बन सकता है ?”
इन्सान किसी भी ग्रन्थ को पढ़कर बुद्धिमान नहीं बन सकताबल्कि वह महान लोगों के संगत में रहकर बुद्धिमान बन सकता है यक्ष ने पूछा, “हवा से भी तेज क्या है ?”
मन” 

                                                                                  “What is more faded than a dried straw?”                                    “A sorrow – stricken heart.”
“What be friends a traveler ?
“Learning”
“Who is the friend of one who stays at home?”
“The wife.”
“Who accompanies a man in death?”
“Dharma, that alone accompanies the soul in its solitary journey after death.”
 “सूखे तिनके से भी अधिक मुरझाया हुआ क्या है ?”
दुःख से भरा हुआ ह्रदय
एक यात्री का मित्र कौन होता है ?”
ज्ञान
घर पर रहने वाले का मित्र कौन होता है ?”
पत्नी
मृत्यु के समय आदमी का साथ कौन जाता है ?”
धर्म ही एक ऐसी वस्तु है जो मृत्यु के बाद आत्मा के साथसाथ जाता है |”

“Which is biggest vessel?”
“The earth, which contains all within itself, is the greatest vessel.”
“What is happiness?”
”Happiness is the result of good conduct.”
“What is that, by giving up which man becomes loved by all?”
“Pride, for if man gives up being proud, he will be loved by all.”
“What is the loss which yields joy and not sorrow?”
“Anger, if we give up being angry, we will no longer he subject to sorrow.”

 “सबसे बड़ा बर्तन क्या है ?”
पृथ्वीजो सबकुछ अपने अन्दर लिए हुए हैसबसे बड़ा बर्तन है
ख़ुशी क्या है ?”
ख़ुशी अच्छे आचरण का परिणाम है
वह क्या हैजिसको छोड़ने पर इन्सान सबका प्यारा बन जाता है ?”
घमंडअगर हम घमंड करना छोड़ दें तो सबके प्रिय बन जायेंगे
वह कौनसा घाटा है जो दुःख नही ख़ुशी देता है ?”
क्रोधअगर हम क्रोधित होना छोड़ दे तो हम कभी भी दुखी नहीं होंगे






“What is that, by giving-up which a man becomes rich?”
“Desire. If man gives up being greedy, he will become wealthy.”
“What makes one a real ‘Bhahima?’ Is it birth, good conduct, or learning? Answer decisively.”
“Birth and learning do not make one a Brahmana; good conduct alone does. However learned a person may be, he will not be a ‘Brahmana’ without giving up bad habits. Even though he may be learned in the four Vedas, a man of bad conduct falls to a lower class.”

वह क्या हैजिसको छोड़कर इन्सान धनि बन जाता है
इच्छाअगर इन्सान लालची बनना छोड़ दे तब वह धनी बन जायेगा |”
इन्सान को क्या असली ब्राहमण बनाता हैजन्मअच्छा आचरण या ज्ञान स्पष्ट  उत्तर देना
जन्म या ज्ञान इन्सान को ब्राहमण नहीं बनाता है बल्कि अच्छा आचरण इन्सान को ब्राहमण बनाता है ज्ञानी व्यक्ति बिना बुरा आचरण छोड़े ब्राहमण नहीं बन सकता भले ही उसने चारो वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया हो। बुरे आचरण वाला व्यक्ति निम्नवर्ग का होता है

“What is the greatest wonder in the world?”
“Every day men see creatures depart to Yama’s kingdom; and yet those who remain want to live forever. This truly is the greatest wonder.”
Thus, the Yaksha put many questions and Yudhishthira answered them all.                                  
दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?”
प्रतिदिन मनुष्य प्राणियों को यम के राज मे जाते हुए देखता है उसके बाद भी वह हमेशा के लिए जीवित रहना चाहता है यह दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य है
इसी तरह यक्ष ने कई प्रश्नों को पूछा और युधिष्ठिर ने सभी का उत्तर दे दिया |

In the end the Yaksha asked “O, King one of your dead brothers can now be revived. Who do you want to come back to life?”
It took Yudhishthira a moment to think and then he wished that the cloud-complexioned, lotus-eyed, broad-chested and long-armed Nakula, laying like a fallen ebony tree, might arise.
अंत में यक्ष ने पूछा, “राजा मरे हुए भाइयों में से कोई एक जीवित हो सकता है तुम किसे जीवित करना चाहते हो ?

कुछ क्षण सोचकर युधिष्ठिर ने कहा की वह बादलरूपी कमलनयनीचौड़ी छाती वाला तथा लम्बी भुजाओं वाले नकुलजो एक आबनूस की तरह लेटा हुआ हैउठना चाहिए |
The Yaksha was pleased at this and asked Yudhishthira : “Why did you choose Nakula in preference to Bhima, who has the strength of sixteen thousand elephants? I have heard that Bhima is most dear to you. And why not Arjuna, whose strength in arms is your protection? Tell me why you choose Nakula rather than either of these two.”

इसपर यक्ष प्रसन्न हुआ और युधिष्ठिर से पूछा : तुमने भीम की बजाय नकुल को क्यों चुनाजिसके पास 16 हजार हाथियों का बल है मैंने सुना है कि भीम तुमको बहुत प्रिय है और अर्जुन को क्यों नहींजिसके भुजाओं की शक्ति मे  तुम्हारी सुरक्षा है मुझे बताओ तुमने उन दोनों के बजाय नकुल को क्यों चुना

Yudhishthira replied: “O Yaksha, ‘Dharma’ is the only shield of man and not Bhima and Arjuna, If ‘Dharma’ is given up, man will be ruined. Kunti and Madri were the two wives of my father. I am alive, a son of Kunti and so she in not completely bereaved. In order that scales of justice may be even. I ask that Maderi’s son, Nakula may revive.”

युधिष्ठिर ने उत्तर दिया, “हे यक्ष धर्म ही इन्सान का सबसे बड़ा रक्षक है भीम और अर्जुन नहीं अगर धर्म को छोड़ दिया जाये तो इन्सान बर्बाद हो जायेगा मेरे पिता की दो पत्नियाँ थीं कुंती और माद्री मैं कुंती का पुत्र जीवित हूँ इसलिए वह पूरी तरह से वंचित है न्याय के दोनों पलड़े बराबर रहे इसलिए लिए मैंने माद्री के पुत्र नकुल को जीवित करने के लिए कहा

The Yaksha was most pleased with Yudhishthira’s impartiality and granted that all his brothers would come back to life.
It was Yama, the Lord of Death, who had taken the form of the Yaksh so that he might see Yudhishthira and test him. He embraced Yudhishthira and blessed him; then he disappeared.

युधिष्ठिर के निष्पक्षता पर यक्ष बहुत प्रसन्न हुए और उन्होने सभी भाइयों को जीवित कर दिया|

वह मौत के देवता यम थेजिन्होंने युधिष्ठिर से मिलने  और उनकी  परीक्षा लेने के लिए यक्ष का रूप लिया था उन्होंने युधिष्ठिर को गले लगाया और आशीर्वाद दियाउसके बाद वह अदृश्य हो गए |


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